सत्य परेशान हो सकता है, मगर पराजित नहीं

निजी स्वार्थो के चलते लगाये जा रहे है सीएम सचिव तन्मय कुमार पर आरोप

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जयपुर। पवन सिंह (स्वतंत्र पत्रकार) – राजस्थान के मुख्यमंत्री के सचिव तन्मय कुमार के बारे में जो कुछ सोशल मीडिया में लिखा जा रहा है उसे पढ़ने के बाद यही कहा जा सकता है कि सत्य परेशान हो सकता है, मगर पराजित नहीं होता है. आरोप लगते हैं लेकिन कुछ आरोप चस्पा होते हैं और कुछ आरोप हवा में खत्म हो जाते हैं. लेकिन सच ये है कि तन्मय कुमार की शख्सियत पर कोई आरोप चस्पा नहीं हो सकता है. 4 साल से ज्यादा समय तक मुख्यमंत्री के सचिव और प्रमुख सचिव रहने के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी, अनियमितता, धोखा, षड्यंत्र,और प्रपंच का आरोप इस अधिकारी पर नहीं लगाया जा सकता है. फिर भी आरोप लग रहा है तो इन आरोपों में तन्मय कुमार और मजबूत होकर निकलेंगे. सोना तपकर कुंदन बनता है. जो सोच रहे हैं तन्मय कुमार इन आरोपों से पिघल जाएगा उन्हें मालूम होना चाहिए कि कुंदन बने तन्मय कुमार की चमक और निखर रही है.

सनातन काल से ईमानदारी की डगर आसान नही होती है, मगर जो टिक गया वो इतिहास पुरुष बनता है. तन्मय कुमार की जिंदगी लोगों को सीख लेने वाली जिंदगी है. पत्नी जयपुर के एक बड़े अस्पताल में डॉक्टर है लेकिन कभी किसी ने नाम नहीं सुना होगा, कोई चेहरे से पहचानता तक नही होगा. पूरा परिवार कर्म को अपनी जिंदगी मानता है .कर्म से बड़ी कोई सेवा नहीं होती है. इसी वजह से दो लड़के भी आज कामयाब हैं. तन्मय कुमार का परिवार एक आदर्श परिवार है. जो सुबह 7 बजे से लेकर रात को 12 बजे तक दफ्तर में राजस्थान के लोगों की भलाई के लिए लगा रहता है उसके बारे में भी कुछ लोग इतनी गंदी सोच रखते हैं यह सोच कर घिन्न आती है. राजस्थान में कोई एक शख्स नही ढूंढ पाएंगे जो कह पाए की हमने तन्मय कुमार तक एक मिठाई का डिब्बा तक पहुंचाया है. तन्मय कुमार के बारे में कहा जा रहा है कि दिल्ली रोड के चिताणु गांव में उनका फार्म हाउस है.पर सच्चाई तो यह है कि तन्मय कुमार को गांव में जाने का रास्ता पता नहीं होगा. आदमी अपने काम में सफल हो या असफल हो ये अलग बात है. राजस्थान की जनता उनके काम से खुश हो या नहीं हो ये लोकतंत्र में जनता तय करती है ,लेकिन एक व्यक्ति जो काम के प्रति निष्ठा रखता है उसे लेकर लोगों को सम्मान करना चाहिए. जो लोग तन्मय कुमार को नजदीक से जानते हैं उन्हें पता है कि यह व्यक्ति अपने काम के अलावा किसी दूसरे काम पर ध्यान नहीं देता है .

मुख्यमंत्री के सचिव के रहते फर्ज बनता है कि मुख्यमंत्री के पास से जो निर्देश मिले उसे पालन किया जाए . तन्मय कुमार को अशोक गहलोत का प्रमुख सचिव बना दिए जाएं तो वह यही काम वहां भी करेंगे. सचिव होने के नाते मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करना धर्म है. यह सोचकर हैरानी होती है कि वसुंधरा राजे इतनी ताकतवर मुख्यमंत्री हैं और उनके निजी सचिव के बारे में इस तरह से बातें कही जा रही है, लेकिन जयपुर कमिश्नर से लेकर डीजीपी तक सब खामोश बैठे हैं. क्या लिखने वाले से तन्मय कुमार की कोई व्यक्तिगत दुश्मनी है या फिर सरकार में रहते हुए और सरकार का काम करते हुए कोई नाराजगी है, जिसकी वजह से दुश्मनी निकाली जा रही है। लेकिन सरकार में ऊंचे ओहदे पर बैठे लोगों को परवाह नहीं है क्योंकि वह अपने व्यक्तिगत लाभ हानि का समीकरण देख रहे हैं.

कांग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी के परिवार पर टिप्पणी के लिए गुजरात का डीजीपी सक्रिय होकर गिरफ्तारी करवाता है, मगर राजस्थान के डीजापी और जयपुर कमिश्नर को कोई फर्क नही पड़ रहा है. सवाल उठता है कि तन्मय कुमार से कोई अगर नाराज है. या फिर तन्मय कुमार का दुश्मन है तो आखरि क्यों. इसके दो तरह के जवाब है. पहला तो इस मामले में वो जहां पर बैठे हैं, वहां लीकेज यानी भ्रष्टाचार को रोकने की भरसक कोशिश की है. इतनी बड़ी सरकार में कोई एक व्यक्ति पूरी तरह से लिकेज जो रोक दें, यह संभव नहीं है. हां इतना जरूर है कि आज तन्मय कुमार की वजह से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सीएमओ पर कोई भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लग पा रहे हैं. भ्रष्ट अधिकारी हो या फिर भ्रष्ट नेता, उनका कोई गलत काम नहीं हो पा रहा है, तो वह इस तरह के दुष्प्रचार को हवा देने में लगे हैं. उनकी दुश्मनी तन्मय कुमार से नहीं है, बल्कि उनकी दुश्मनी इस बात से है कि उनके गलत काम नहीं हो पा रहे हैं. दूसरे वो लोग हैं जो इस बात से नाराज हैं कि तन्मय कुमार ने उन्हें दंडित किया है. अब सवाल उठता है कि किसी राज्य के किसी इलाके में कोई दंगा होता है और वहां पर एक पार्टी विशेष के लोग किसी को हटाने की मांग करते हैं, और मुख्यमंत्री कारर्वाई के निर्देश देती है तो मुख्यमंत्री सचिव होने के नाते निर्देश की पालना करने वाला अधिकारी कैसे दोषी हो सकता है. अगर नाराजगी है तो मुख्यमंत्री से होनी चाहिए ना कि उसके सचिव से। लेकिन मुख्यमंत्री से नाराज होने की या फिर उनके खिलाफ कुछ लिखने की औकात नहीं है इसलिए आसपास से कमजोर व्यक्ति को निशाना बनाते हैं.

मुख्यमंत्री के पास कई तरह के अलग-अलग सोर्स होते हैं. जिनकी पहुंच विभिन्न सोर्स के जरीए मुख्यमंत्री के पास होती है. ये सोर्स कई तरह के काम काम करवा पाते हैं. और जो काम वह नहीं करवा पाते हैं उसे लेकर जनता में भ्रम फैलाते हैं. तन्मय कुमार की वजह से वह काम नहीं हो पा रहा है. इस मामले में फैलाई जा रही अफवाह और गलत खबरों पर ध्यान न देकर प्रदेश के प्रत्येक ईमानदार व्यक्ति को कोशिश करनी चाहिए कि वह इन बेईमानों के खिलाफ़ संघर्ष का बिगुल बजाय ताकि पर्दे के पीछे छिपे इन चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

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